Tuesday, April 7, 2026

କାକଟପୁରର ଅଧିଷ୍ଠାତ୍ରୀ ଦେବୀ ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ପ୍ରସିଦ୍ଧ ‘ଝାମୁ ଯାତ୍ରା’ ଓଡ଼ିଶାର ଶକ୍ତି ଉପାସନା କ୍ଷେତ୍ରରେ କାକଟପୁରର ଅଧିଷ୍ଠାତ୍ରୀ ଦେବୀ ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ପ୍ରସିଦ୍ଧ ‘ଝାମୁ ଯାତ୍ରା’ ଏକ ଅନନ୍ୟ ଏବଂ ଭକ୍ତିମୟ ପର୍ବ। ଚୈତ୍ର ମାସର ପ୍ରତି ମଙ୍ଗଳବାରରେ ପାଳିତ ହେଉଥିବା ଏହି ଯାତ୍ରାର ଶେଷ ପର୍ଯ୍ୟାୟ ବା ‘ଉଦ୍‌ଯାପନୀ ମଙ୍ଗଳବାର’ ଆଜି ସାରା ରାଜ୍ୟରେ ଏକ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଶିହରଣ ସୃଷ୍ଟି କରିଛି। ଏହି ଯାତ୍ରା ସମ୍ପର୍କରେ ଏକ ସଂକ୍ଷିପ୍ତ ଓ ଭକ୍ତିପୂର୍ଣ୍ଣ ବିବରଣୀ ନିମ୍ନରେ ପ୍ରଦତ୍ତ: ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ଝାମୁ ଯାତ୍ରା: ଏକ ପବିତ୍ର ପରମ୍ପରା ୧. ଝାମୁ ଯାତ୍ରାର ପୃଷ୍ଠଭୂମି କାକଟପୁର ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ପାଞ୍ଚଟି ମଙ୍ଗଳବାରରେ ପାଳିତ ହେଉଥିବା ଚୈତ୍ର ପର୍ବ ମଧ୍ୟରେ ଝାମୁ ଯାତ୍ରା ହେଉଛି ସବୁଠାରୁ ଗୁରୁତ୍ଵପୂର୍ଣ୍ଣ। ଏହି ସମୟରେ ମା’ଙ୍କ ପାଖରେ ମାନସିକ ରଖିଥିବା ଭକ୍ତମାନେ ‘ପାଟୁଆ’ ସାଜନ୍ତି। ସେମାନେ କଠୋର ବ୍ରତ ପାଳନ କରି ନିଜର ନିଷ୍ଠା ଓ ଭକ୍ତିର ପ୍ରମାଣ ସ୍ଵରୂପ ଜଳନ୍ତା ଅଙ୍ଗାର ଉପରେ ଚାଲିଥାନ୍ତି। ୨. କାକଟପୁର ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ପୀଠ ଏବଂ ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଝାମୁ ଯାତ୍ରାର ଇତିହାସ ଅତ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରାଚୀନ ଏବଂ ଏହା ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରତ୍ନତାତ୍ତ୍ଵିକ ତଥା ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଇତିହାସ ସହ ଜଡ଼ିତ। ଏହି ପବିତ୍ର ପୀଠର ଉତ୍ପତ୍ତି ଓ ବିକାଶ ସମ୍ପର୍କରେ କିଛି ଗୁରୁତ୍ଵପୂର୍ଣ୍ଣ ଐତିହାସିକ ତଥ୍ୟ ନିମ୍ନରେ ଦିଆଗଲା: ୩. ପ୍ରାଚୀ ଉପତ୍ୟକା ସଭ୍ୟତା ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ମନ୍ଦିର ପବିତ୍ର ପ୍ରାଚୀ ନଦୀ କୂଳରେ ଅବସ୍ଥିତ। ଐତିହାସିକମାନଙ୍କ ମତରେ ପ୍ରାଚୀ ଉପତ୍ୟକା ଓଡ଼ିଶାର ସବୁଠାରୁ ପ୍ରାଚୀନ ସଭ୍ୟତା ମଧ୍ୟରୁ ଅନ୍ୟତମ। ଏହି ଅଞ୍ଚଳରେ ବୌଦ୍ଧ, ଜୈନ, ଶୈବ ଏବଂ ଶାକ୍ତ ଧର୍ମର ଅପୂର୍ଵ ସମନ୍ଵୟ ଦେଖିବାକୁ ମିଳେ। ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ମୂର୍ତ୍ତି ମଧ୍ୟ ବୌଦ୍ଧ ‘ତାରା’ ମୂର୍ତ୍ତି ସଦୃଶ ବୋଲି ଅନେକ ଗବେଷକ ମତ ଦିଅନ୍ତି। ୪. ମା’ଙ୍କ ଆବିର୍ଭାବ କିମ୍ବଦନ୍ତୀ ଲୋକକଥା ଅନୁଯାୟୀ, କାକଟପୁରର ଜଣେ ନୌଶିଳ୍ପୀ (ବଣିକ) ପ୍ରାଚୀ ନଦୀରେ ନାଆ ଚଳାଇବା ସମୟରେ ମା’ଙ୍କୁ ଜଳ ମଧ୍ୟରେ ଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ। ମା’ ତାଙ୍କୁ ସ୍ଵପ୍ନାଦେଶ ଦେଇଥିଲେ ଯେ ସେ ନଦୀ ଗର୍ଭରେ ଅଛନ୍ତି ଏବଂ ତାଙ୍କୁ ଉଦ୍ଧାର କରି ସ୍ଥାପନ କରାଯାଉ। ସେହି ସମୟରୁ ମା’ ମଙ୍ଗଳା ସେଠାରେ ପୂଜା ପାଇ ଆସୁଛନ୍ତି। ୫. କାକଟପୁର ନାମକରଣ: କୁହାଯାଏ ଯେ ମା’ଙ୍କ ସନ୍ଧାନ ଦେବାରେ ଏକ ‘କାଉ’ (କାକ) ସାହାଯ୍ୟ କରିଥିଲା, ଯେଉଁଠାରୁ ଏହି ସ୍ଥାନର ନାମ କାକଟପୁର ହୋଇଛି। ୬. ଶ୍ରୀଜଗନ୍ନାଥ ସଂସ୍କୃତି ସହ ସମ୍ପର୍କ (ନବକଳେବର) ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ଇତିହାସ ଶ୍ରୀଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ନବକଳେବର ସହ ଅଙ୍ଗାଙ୍ଗୀଭାବେ ଜଡ଼ିତ। * ଶ୍ରୀମନ୍ଦିରରୁ ବାହାରିଥିବା ବନଯାଗୀ ଦଳ ଦାରୁ ଅନ୍ଵେଷଣ ସମୟରେ କାକଟପୁର ଯାଇଥାନ୍ତି। * ସେଠାରେ ଦେଉଳି ମଠରେ ଅବସ୍ଥାନ କରି ସେମାନେ ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କୁ ସ୍ତୁତି କରନ୍ତି। * ବିଶ୍ଵାସ କରାଯାଏ ଯେ ମା’ ସ୍ଵପ୍ନାଦେଶ ମାଧ୍ୟମରେ ଦାରୁର ସଠିକ୍ ସ୍ଥାନ ଓ ଦିଗ ସମ୍ପର୍କରେ ସୂଚନା ଦେଇଥାନ୍ତି। ଏହା ଶତାବ୍ଦୀ ଶତାବ୍ଦୀ ଧରି ଚାଲିଆସୁଥିବା ଏକ ଅବିଛିନ୍ନ ପରମ୍ପରା। ୭. ଝାମୁ ଯାତ୍ରାର ଇତିହାସ ଝାମୁ ଯାତ୍ରା ବା ‘ଅଗ୍ନି ପରୀକ୍ଷା’ର ପରମ୍ପରା ମା’ଙ୍କ ପ୍ରତି ଭକ୍ତଙ୍କ ଅତୁଟ ବିଶ୍ଵାସର ପ୍ରତୀକ। * ଶାକ୍ତ ପରମ୍ପରା: ଏହା ମୁଖ୍ୟତଃ ଓଡ଼ିଶାର ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳରେ ପ୍ରଚଳିତ ଶାକ୍ତ ଉପାସନାର ଏକ ଅଂଶ। ପୁରାତନ କାଳରୁ ମାନସିକଧାରୀମାନେ ନିଜର ଭକ୍ତି ପ୍ରମାଣ କରିବାକୁ ଏହି କଠୋର ବ୍ରତ ପାଳନ କରିଆସୁଛନ୍ତି। * ସାମାଜିକ ସମନ୍ଵୟ: ଝାମୁ ଯାତ୍ରାରେ ବିଭିନ୍ନ ଜାତି ଓ ବର୍ଣ୍ଣର ଭକ୍ତମାନେ ଏକାଠି ହୋଇ ‘ପାଟୁଆ’ ସାଜନ୍ତି, ଯାହା ସମାଜରେ ଏକତା ଓ ଭ୍ରାତୃଭାବର ବାର୍ତ୍ତା ଦିଏ। ୮. ମନ୍ଦିର ସ୍ଥାପତ୍ୟ ବର୍ତ୍ତମାନର ମନ୍ଦିରଟି ପ୍ରାୟ ୧୫-୧୬ଶ ଶତାବ୍ଦୀରେ ପୁନଃନିର୍ମାଣ କରାଯାଇଥିବା ଅନୁମାନ କରାଯାଏ। ଏହାର କାରୁକାର୍ଯ୍ୟ ଓ ବେଢ଼ା ମଧ୍ୟରେ ଥିବା ବିଭିନ୍ନ ପାର୍ଶ୍ଵ ଦେବଦେବୀ ଓଡ଼ିଶାର ସମୃଦ୍ଧ କଳାକୃତିର ପରିଚୟ ଦିଅନ୍ତି। ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ଝାମୁ ଯାତ୍ରା କେବଳ ଏକ ମେଳା ନୁହେଁ, ବରଂ ଓଡ଼ିଆ ଜାତିର ସାହସ, ତ୍ୟାଗ ଏବଂ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ନିଷ୍ଠାର ଏକ ଐତିହାସିକ ଦଲିଲ। ୯. ଆଜିର ମୁଖ୍ୟ ଆକର୍ଷଣ: ‘ନିଆଁ ପାଟୁଆ’ ଆଜିର ଦିନରେ କାକଟପୁରର ପ୍ରାଚୀ ନଦୀ କୂଳରୁ ପାଟୁଆମାନେ ନିଷ୍ଠାର ସହ ପବିତ୍ର ବୁଡ଼ ପକାଇ, ମା’ଙ୍କ ଆଜ୍ଞାମାଳ ଧରି ଶୋଭାଯାତ୍ରାରେ ମନ୍ଦିର ଅଭିମୁଖେ ଆସନ୍ତି। ମନ୍ଦିର ସମ୍ମୁଖରେ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହୋଇଥିବା ପ୍ରାୟ ୧୦-୧୨ ଫୁଟ ଲମ୍ବର ଜଳନ୍ତା ଅଙ୍ଗାର କୁଣ୍ଡ (ଯାହାକୁ ‘ନିଆଁ ଖନ୍ଦା’ କୁହାଯାଏ) ଉପରେ ପାଟୁଆମାନେ ଅତି ସହଜରେ ଚାଲି ଚାଲି ଯାଆନ୍ତି। ମା’ଙ୍କ ମହିମାରୁ ସେମାନଙ୍କ ପାଦରେ କୌଣସି ଆଘାତ ଲାଗିନଥାଏ ବୋଲି ବିଶ୍ଵାସ କରାଯାଏ। ୧୦. ମା’ଙ୍କ ବିଶେଷ ବେଶ ଓ ପୂଜା ଝାମୁ ଯାତ୍ରା ଅବସରରେ ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କୁ ଅତି ସୁନ୍ଦର ଭାବେ ସଜ୍ଜିତ କରାଯାଇଥାଏ। ଭକ୍ତମାନଙ୍କ ଗହଳି ଭିତରେ ମା’ଙ୍କୁ ଦର୍ଶନ କଲେ ସମସ୍ତ ବିପଦ ଦୂର ହୁଏ ବୋଲି ମାନ୍ୟତା ରହିଛି। ଆଜି ସନ୍ଧ୍ୟାରେ ମନ୍ଦିର ବେଢ଼ାରେ ହଜାର ହଜାର ଦୀପ ଜଳାଯାଇ ଏକ ସ୍ଵର୍ଗୀୟ ପରିବେଶ ସୃଷ୍ଟି କରାଯାଏ। ୧୧. ସାଂସ୍କୃତିକ ଓ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ମହତ୍ଵ * ମାନସିକ ପୂରଣ: ଯେଉଁ ଭକ୍ତମାନେ ଦୁଃସାଧ୍ୟ ରୋଗ ବା ସଙ୍କଟରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇଁ ମାନସିକ କରିଥାନ୍ତି, ସେମାନେ ପାଟୁଆ ହୋଇ ନିଆଁ ଉପରେ ଚାଲନ୍ତି। * ଘଣ୍ଟ ଓ କାହାଳୀ: ପାଟୁଆଙ୍କ ଯାତ୍ରା ସମୟରେ ଘଣ୍ଟ, କାହାଳୀ ଏବଂ “ମା’ ମଙ୍ଗଳାଙ୍କ ଜୟ” ଧ୍ଵନିରେ ଗଗନ ପବନ ପ୍ରକମ୍ପିତ ହୋଇଉଠେ। > “ଜୟ ମା’ କାକଟପୁର ମଙ୍ଗଳା” > ମା’ଙ୍କ କୃପାରୁ ଆପଣଙ୍କ ଜୀବନ ସୁଖମୟ ହେଉ ଏବଂ ସମସ୍ତ ଅଶୁଭ ଶକ୍ତିର ବିନାଶ ହେଉ। काकतपुर की अधिष्ठात्री देवी माँ मंगला की प्रसिद्ध 'झामू यात्रा' काकतपुर के आदिष्ट्री ओडिशा के शक्ति पूजन क्षेत्र में माँ मंगला की प्रसिद्ध 'झामू यात्रा' एक अनोखा और भक्तिमय पर्व है। चैत्र महीने के हर मंगलवार को मनाई जाने वाली इस यात्रा या 'उदयपानी मंगलवार' के अंतिम चरण ने आज पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक कंपन पैदा कर दिया है। नीचे इस यात्रा का एक संक्षिप्त और भक्तिपूर्ण वर्णन है: माँ मंगला की झामू यात्रा : एक पवित्र परंपरा । झामू यात्रा की पृष्ठभूमि काकतपुर माँ मंगला के पांच मंगलवार को मनाए जाने वाले चैत्र पर्वों में झामू यात्रा सबसे महत्वपूर्ण है। इस समय माँ से मन लगाने वाले भक्त 'पटुआ' बन जाते हैं। वे अपनी भक्ति और भक्ति के प्रमाण के रूप में कठोर व्रत रखते हैं और जलते अंगारों पर चलते हैं। ୨. काकतपुर माँ मंगला की दरगाह और प्रसिद्ध झामू यात्रा का इतिहास बहुत प्राचीन है और यह ओडिशा के पुरातात्विक और आध्यात्मिक इतिहास से संबंधित है। इस पवित्र मंदिर की उत्पत्ति और विकास के बारे में कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य नीचे दिए गए हैं: 3. प्राचीन घाटी की सभ्यता पवित्र प्राची नदी के तट पर स्थित है माँ मंगला का मंदिर। इतिहासविदों के अनुसार, प्राचीन घाटी ओडिशा की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। इस क्षेत्र में बौद्ध, जैन, शैबा और शाक्त धर्म का अनोखा संगम देखने को मिलता है। कई रिसर्चर्स इस बात से सहमत हैं कि मां मंगला की मूर्ति भी बौद्ध 'तारा' की मूर्ति के समान है। ୪. एक माँ का उद्भव पौराणिक है लोककथाओं के अनुसार काकतपुर के एक नाविक (व्यापारी) ने प्राची नदी में बोटिंग करते समय अपनी माँ को पानी में देखा। माँ ने सपना दिया था कि वह नदी के गर्भ में है और उसे बचाया और स्थापित किया जाए। तब से माँ मंगला पूजा करती आ रही है। ୫. काकतपुर नाम परिवर्तन: बताया जा रहा है कि एक 'गाय' ने मां को ढूंढने में मदद की, जहां से इस जगह का नाम काकतपुर है। ୬. श्री जगन्नाथ संस्कृति के साथ संबंध (नबकलेबरा) माँ मंगला का इतिहास श्री जगन्नाथ के नवकलेबारा से निकटता से जुड़ा हुआ है। *श्रीमंदिर से निकला बनयागी दल दारू की तलाश में काकतपुर गया। *देवली मठ में रहकर माँ मंगला का गुणगान करते हैं* *ऐसा माना जाता है कि माँ स्वप्नदेश के माध्यम से शराब के सटीक स्थान और दिशा की जानकारी देती है। यह एक अविभाज्य परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है ୭. झामू यात्रा का इतिहास झामू यात्रा या 'अग्नि परीक्षा' की परंपरा माता के प्रति भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है। *शक्त परंपरा: यह मुख्य रूप से ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में शक्त पूजा का एक हिस्सा है। मानसिकतावादी प्राचीन काल से ही अपनी भक्ति सिद्ध करने के लिए यह कठोर व्रत करते आ रहे हैं। *सामाजिक समन्वय: विभिन्न जाति-जाति के भक्त मिलकर 'पटुआ' का निर्माण करते हैं, जो समाज में एकता और बंधुत्व का संदेश देता है। 8. मंदिर वास्तुकला वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण लगभग 15-16 वीं शताब्दी के आसपास किया गया था। देवी-देवताओं के विभिन्न पहलू इसकी कलाकृतियों और पर्दे के बीच ओडिशा के समृद्ध कलात्मक कार्यों को दर्शाती हैं। माँ मंगला की झामू यात्रा सिर्फ मेला नहीं, बल्कि ओडिया जाति के साहस, त्याग और आध्यात्मिक समर्पण का ऐतिहासिक दस्तावेज है। .. आज का मुख्य आकर्षण : 'आग पटुआ' आज के दिन काकतपुर की प्राची नदी के तट से पटुआ श्रद्धा से डुबकी लगाकर माँ की आज्ञा को लेकर मंदिर की ओर आते हैं। मंदिर के सामने तैयार लगभग 10-12 फीट लंबे जलते अंगारे के बर्तन (जिसे 'आग काखंड' भी कहते हैं) पर पटुए आसानी से चलते हैं। माना जाता है कि मां की महिमा से उनके पैरों में चोट नहीं लगती है। 10. माँ का विशेष पहनावा और पूजा झामू यात्रा के अवसर पर माँ मंगला का सुंदर श्रृंगार पता चला भक्तों की भीड़ में माँ के दर्शन करने से सारे संकट दूर हो जाते हैं। आज शाम मंदिर बेढा में हजारों दीप जलाए गए और स्वर्ग का वातावरण बना। 11. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व *मानसिक सिद्धि: जो भक्त बुरी बीमारी या संकट से छुटकारा पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहते हैं, वे चिमनी लेकर अग्नि पर चलते हैं। *घंट और कहली: पटुआ की यात्रा के दौरान आसमान की हवा घंटा, कहली और "माँ मंगला के आनंद" की आवाज से थरथराती है। >"जय माँ काकतपुर मंगला">. माँ की कृपा से आपका जीवन मंगलमय हो और सभी बुरी शक्तियों का नाश हो। www.navjivanfoundation.org


 

अय्याशी करते है मोदी! मधुकिश्वर के साथ आए IPS! www.navjivanfoundation.org


 

पीट-पीट कर पीटा था अब फांसी लगाकर मारेगा... www.navjivanfoundation.org


 

Why India Supreme Court not punish to Narendra Modi after this speech on the time of entire nation ? Why India public keep faith on Indian Supreme Court? www.navjivanfoundation.org


 

नरेंद्र मोदी नहीं, ये हैं Best PM। | Subramanian Swamy | Narendra Modi www.navjivanfoundation.org


 

One one person Trump destroy all peace of world and in India Narendra Modi,Amit Saha also in the same Q . We are surprise on why Int'l Criminal Court silent on this matter even after in Epstein Files some names declared. These group are most unsocial eliment www.navjivanfoundation.org