Saturday, April 18, 2026
समय बदल गया है, लेकिन अभी भी वही अपरिवर्तनीय आकर्षण है। 1880 के शांत नीलाचल सैकट से आज का आधुनिक पुरी बीच। सदियों से भगवान महाप्रभु की शारदाबली भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है। जय श्री जगन्नाथ जी की ! समय का रेत का घर टूट कर बना है। लेकिन नीलाद्रि का मोह कम नहीं हुआ। 1880 का वो अकेला समय, आज जन सागर में तब्दील हो गया। ओडिशा की शान हमारी पुरी " ସମୟ ବଦଳିଛି, ହେଲେ ସେହି ଅପରିବର୍ତ୍ତିତ ଆକର୍ଷଣ ଆଜି ବି ଅଛି। ୧୮୮୦ର ଶାନ୍ତ ନୀଳାଚଳ ସୈକତରୁ ଆଜିର ଆଧୁନିକ ପୁରୀ ବେଳାଭୂମି। ଶତାବ୍ଦୀ ଶତାବ୍ଦୀ ଧରି ମହାପ୍ରଭୁଙ୍କ ଶରଧାବାଲି ଭକ୍ତଙ୍କୁ ନିଜ ଆଡ଼କୁ ଟାଣି ଆଣୁଛି। ଜୟ ଜଗନ୍ନାଥ! ସମୟର ବାଲିଘର ଭାଙ୍ଗିଛି ଗଢ଼ିଛି, ହେଲେ ନୀଳାଦ୍ରିର ମୋହ କମିନାହିଁ। ୧୮୮୦ର ସେହି ନିଛାଟିଆ ବେଳା, ଆଜି ଜନସମୁଦ୍ରରେ ପରିଣତ। ଓଡ଼ିଶାର ଗର୍ବ, ଆମ ପୁରୀ।" www.navjivanfoundation.org
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment