Saturday, July 18, 2026

क्रांतिकारी पिता की क्रांतिकारी बेटी – श्रेया कुसुम सिन्हा श्रेया कुसुम सिन्हा बिहार के सिवान जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता राकेश कुमार सिंह सिवान प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष हैं। सामाजिक सरोकारों और जनसंघर्षों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए श्रेया आज छात्र-युवा आंदोलन की एक सक्रिय और प्रतिबद्ध कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। श्रेया ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) बिहार राज्य परिषद की सदस्य तथा AIYF की राष्ट्रीय यंग वूमेन सब-कमेटी की सदस्या हैं। वर्तमान में वे दिल्ली में विधि (एलएलबी) की पढ़ाई कर रही हैं। नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान, जब मूसलाधार बारिश में भीग रहे AISF के साथियों के लिए वाटरप्रूफ तिरपाल लेकर जाने से दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोका, तब श्रेया ने निर्भीकता से इसका विरोध किया। पुलिस के साथ हुई तीखी नोकझोंक और कथित बर्बर व्यवहार के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया। इस संघर्ष के दौरान उनके पैर में चोट भी लगी, लेकिन इसके बावजूद वे अंत तक आंदोलन के मैदान में डटी रहीं। उनके दृढ़ संकल्प और साहस के सामने अंततः दिल्ली पुलिस को अपना रवैया बदलना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी। श्रेया का यह जुझारूपन, साहस और संघर्षशील व्यक्तित्व वास्तव में प्रेरणादायक है। इतनी कम उम्र में अन्याय के खिलाफ जिस निर्भीकता से उन्होंने आवाज बुलंद की, वह छात्र-युवा आंदोलन के लिए एक सकारात्मक संदेश है। पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में श्रेया कुसुम सिन्हा छात्र-युवाओं की एक सशक्त, संघर्षशील और प्रभावशाली आवाज बनकर उभरेंगी। संघर्ष ही पहचान है, और श्रेया कुसुम सिन्हा उसी संघर्ष की एक सशक्त मिसाल हैं। www.navjivanfoundation.org


 

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