Monday, July 27, 2026

“जो समाज राम मंदिर चढ़ावा चोरी से विचलित नहीं हुआ, उसे किसी बात पर शर्म नहीं आ सकती।” जस्टिस अतुल श्रीधरन की यह टिप्पणी केवल एक मामले पर नहीं, बल्कि आस्था से जुड़े धन की सुरक्षा और समाज की संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्न खड़ा करती है। मंदिरों में भक्तों द्वारा चढ़ाया गया धन श्रद्धा का प्रतीक है। उसकी चोरी पर समाज और व्यवस्था दोनों का मौन चिंताजनक है। www.navjivanfoundation.org


 

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