Wednesday, August 12, 2026

क्या ये वही शाह हैं जिनसे लोग घबराते थे, ख़ुद घबराए से लगते हैं, विक्टिम कार्ड का सहारा लेना पड़ गया अगर आप सत्ता के रूपकों को समझते हैं, उसके शीर्ष पायदान पर खड़े लोगों को देखने का तरीका जानते हैं तो पिछले 18 दिन अमित शाह के पतन के दिन कहे जा सकते हैं। जिस व्यक्ति भय का भयंकर चेहरा बना कर पेश किया गया वही व्यक्ति दिल्ली पुलिस की हिंसा पर बयान देने से भयभीत नज़र आ रहे हैं। अमित शाह कोई मामूली या कमज़ोर नेता नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी को पहली बार जीत मिली है, इसका बड़ा श्रेय शाह की रणनीति को दिया जाता है मगर वही शाह मानसूून सत्र में विजेता की तरह नहीं आ सके। यह राजनीति की विडंबना है। जिसे सीना तान कर आना था, वही सदन का सामना नहीं कर सका। पराजय में पतन तो स्वाभाविक है मगर विजय के क्षणों में भी किसी का ऐसा पतन हो सकता है। अमित शाह इन 18 दिनों को नहीं भूलेंगे। वे बदला लेने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं। उनकी आहट देख कर लोग रास्ता बदल लेते थे मगर 18 दिनों में काफी कुछ बदल दिया है। जब दहशत ही न हो तो दहाड़ने से क्या फायदा। उम्मीद है आप हमारा यह वीडियो पूरा देखेंगे www.navjivanfoundation.org


 

No comments:

Post a Comment