Saturday, March 28, 2026
ଭଗବାନ କଳ୍କିଙ୍କ ଆଗମନ: ଏହା କ’ଣ ସତ? ଚାରୋଟି ଅଦ୍ଭୁତ ସଙ୍କେତର ବ୍ୟାଖ୍ୟା ଜଗତର ଶେଷ ସମୟରେ, 'କଳ୍କି ଅବତାର'ଙ୍କ ଆଗମନ ବିଷୟରେ ଶାସ୍ତ୍ର ଏବଂ 'ଭବିଷ୍ୟ ମାଳିକା'ରେ ଅନେକ ଭବିଷ୍ୟବାଣୀ କରାଯାଇଛି। ଆସନ୍ତୁ ଜାଣିବା ଏହି ଚାରୋଟି ମୁଖ୍ୟ ସଙ୍କେତ ବିଷୟରେ, ଯାହା ଚିତ୍ରରେ ଦର୍ଶାଯାଇଛି। ୧. ଚନ୍ଦ୍ରରେ ତାରା: 'ଭବିଷ୍ୟ ମାଳିକା' ଅନୁସାରେ, ଜୀବନ୍ତ ଚନ୍ଦ୍ରତଳେ ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ତାରା ଦେଖାଯିବା। ଏହା ୨୦୦୫ ମସିହାରେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ଦେଖାଯାଇଥିଲା। ୨. ଛାଇ ଏବଂ ଆକାଶରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ: କୁହାଯାଏ, ନିଜର ଛାଇ ନ ଦେଖାଯିବା ଏବଂ ଆକାଶରେ ଅଦ୍ଭୁତ ପରିବର୍ତ୍ତନ (ଲାଲ୍ ରଙ୍ଗ ବା ଧ୍ରୁବ ତାରା ନ ଦେଖାଯିବା) 'ଅକାଳ ମୃତ୍ୟୁ' ଏବଂ 'ଉଲ ଯୁଗ'ର ସୂଚକ। ୩. ବିରଜା ମନ୍ଦିର ଏବଂ ଓଡ଼ିଶାରେ ଜନ୍ମ: ଓଡ଼ିଶାର ଯାଜପୁର ସ୍ଥିତ 'ବିରଜା ମନ୍ଦିର' କଳ୍କିଙ୍କ ଜନ୍ମସ୍ଥାନ ଭାବରେ ବର୍ଣ୍ଣିତ। କୁହାଯାଏ, ସମୟ ଆସିଲେ ମାଆ ବିରଜାଙ୍କ ପ୍ରତିମା (କଳିକା ରୂପ) ନିଜ ସ୍ଥାନ ଛାଡ଼ିବେ। ୪. କଳିଯୁଗର ଅନ୍ଧକାର ଶେଷ: ସମାଜରେ ଛଳ, ଭ୍ରମ, ଏବଂ ଲୋଭ ଭଳି ଅନ୍ଧକାରମୟ ପ୍ରବୃତ୍ତିର ବୃଦଧି। ଏହା କଳିଯୁଗ ଶେଷର ପ୍ରତୀକ, ଏବଂ ସତ୍ୟ ଯୁଗର ଆଗମନର ସଙ୍କେତ। ଆପଣ ଏହି ସଙ୍କେତଗୁଡ଼ିକୁ କିପରି ଦେଖୁଛନ୍ତି? ଆମ ସହିତ ଶେୟାର କରନ୍ତୁ। www.navjivanfoundation.org
पेट्रोल पंप पर इतनी भीड़! लोग घंटों से लाइन में खड़े हैं, बड़े संकट का संकेत दे रहे हैं। क्या आने वाले दिनों में ईंधन की किल्लत का डर यही है? या सिर्फ डर के प्रभाव? क्या आपके क्षेत्र में भी ऐसी स्थिति है? ପେଟ୍ରୋଲ ପମ୍ପରେ ଏତେ ଭିଡ଼! ଲୋକମାନେ ଘଣ୍ଟା ଘଣ୍ଟା ଧରି ଲାଇନ୍ରେ ଛିଡ଼ା ହୋଇ ରହିଛନ୍ତି, ଯାହା ଏକ ବଡ଼ ସଂକଟର ସଙ୍କେତ ଦେଉଛି। ଏହା କି ଆଗାମୀ ଦିନରେ ଇନ୍ଧନ ଅଭାବର ଆଶଙ୍କା? ନା କି ମାତ୍ର ଭୟର ପ୍ରଭାବ? ଆପଣଙ୍କ ଏରିଆରେ ମଧ୍ୟ ଏମିତି ଅବସ୍ଥା ଅଛି କି? www.navjivanfoundation.org
Friday, March 27, 2026
ତେଲ ଦାମ, କର୍ପୋରେଟ୍ ଲାଭ ଓ ସାଧାରଣ ଲୋକଙ୍କ ଭାର—ଏହି ମୁଦ୍ଦା ଏବେ ଚର୍ଚ୍ଚାର କେନ୍ଦ୍ରବିନ୍ଦୁ! କେହି କହୁଛନ୍ତି ଏହା ଆର୍ଥିକ ନୀତିର ଫଳ, ତ ଆଉ କେହି କହୁଛନ୍ତି ସାଧାରଣ ଲୋକଙ୍କ ଉପରେ ଚାପ ବଢ଼ୁଛି। ଆପଣଙ୍କ ମତ କ’ଣ—ନ୍ୟାୟସଙ୍ଗତ ବ୍ୟବସ୍ଥା ନା ଅସମତା? तेल की कीमत, कॉर्पोरेट मुनाफा और आम लोगों का बोझ - यह मुद्दा अब चर्चा का केंद्र बना हुआ है! कोई कहता है ये आर्थिक नीति का नतीजा है, तो कोई कहता है आम लोगों पर दबाव बढ़ रहा है। www.navjivanfoundation.org
मुकाफ़ात का निज़ाम :- उर्दू का एक शब्द है "मुकाफ़ात" इसका हिंदी में अर्थ होता है "प्रतिफल", "बदला", "सजा" या "पुरस्कार"....!! रम्ज़ी आसिम का एक शेर है.... "हम-नशीं देख मुकाफ़ात-ए-अमल है दुनिया... काम कुछ भी यहाँ अस्बाब नहीं आते हैं" अर्थात, देखो, यह दुनिया कर्मों के फल की महफिल है। यहाँ कोई काम बिना बिना फल के नहीं होता।... "मुकाफ़ात का निज़ाम" इसी को कहते हैं, अर्थात प्रकृति का नियम है कि ""कर्मों का बदला" मिलेगा , जैसा बोलोगे वैसा ही काटोगे... देशी भाषा में कहावत है कि "बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय" यह सब भूमिका मैं आपको यह समझाने के लिए लिख रहा हूं कि महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक के अनैतिक सैक्सुअल आरोप लगाने वाले कल दिन भर ऐसे ही आरोपों से जूझते रहे। महात्मा गांधी का सेक्स संबंध उनकी पोतियों मनु गांधी और आभा गांधी के साथ बताने वाले, जवाहरलाल नेहरू का सेक्स संबंध एडविना माउंटबेटन के साथ बताने वाले, इंदिरा गांधी का सेक्स संबंध एम.ओ. मथाई से बताने वाले, सोनिया गांधी को बार डांसर बताने वाले और राहुल गांधी का सेक्स संबंध एक सुकन्या देवी से बताने वाले कल दिन भर अपने नेताओं पर लगे ऐसे आरोपों पर सन्नाटे में आ गये। इसी को " मुकाफ़ात का निज़ाम" कहते हैं.... सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चरित्र पर आक्रमण करके भाजपा की 3-4 महिलाओं के साथ उनके संबंध की बात की। प्रचंड मोदी भक्त रहीं मधु किश्वर उससे चार क़दम आगे निकल कर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को इसमें घसीट लाईं , मानसी सोनी को लेकर सीडी देखने की बात कीं... यह वही स्मृति ईरानी हैं जो राहुल गांधी पर चुम्बन देने का आरोप लगा चुकीं हैं.... उधर कल ही एक भाजपा नेत्री एक स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा के बड़े नेताओं विजय गोयल, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी के उपर आरोप लगा रही है कि यह लड़कियां बुलाते थे। विजय गोयल उसे शराब पीकर गंदे गंदे मैसेज भेजते थे। यह सब आरोप वैसे ही हैं जैसे सांसद निशिकांत दुबे कांग्रेस के नेताओं पर लगाया करते रहें हैं। बिना सबूत और कंटेंट के। यद्यपि मधु किश्वर कह चुकीं हैं कि वह जल्दी ही सारे सबूत सार्वजनिक करेंगी। ऐसे ही महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं और नेत्रियों के पोर्न वीडियो जैसे तमाम वीडियो कल सोशल मीडिया पर छाए रहे। कल दिन भर यही कोहराम मचा रहा... भाजपा के सर्वोच्च नेता से लेकर निचले स्तर के नेता तक कल इससे जूझते रहे... "मुकाफ़ात का निज़ाम" इसी को कहते हैं... यद्यपि बिना तथ्य और सबूत के किसी पर आरोप लगाना निश्चित रूप से गलत है मगर भाजपा के बड़े नेता यही सबके साथ करते रहें हैं, क्या धार्मिक महापुरुष क्या सामाजिक और क्या राजनीतिक महापुरुष इन्होंने किसी को नहीं छोड़ा... अब ऐसे ही आरोप उनके अपने ही उनपर लगा रहे हैं, IAS प्रदीप शर्मा का उच्चतम न्यायालय में दिया हलफनामा पढ़ा जा रहा है, कपिल मिश्रा का दिल्ली विधानसभा में रिकार्डेड उस हलफनामे के पढ़े जाने का विडियो सोशल मीडिया पर भरा पड़ा है तो महामहिम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के पति का लालकृष्ण आडवाणी को लिखा पत्र भयंकर वायरल है। "मुकाफ़ात का निज़ाम" इसी को कहते हैं... वही सब सामने आ रहा है...और जब सत्ता जाएगी तो और भी बहुत कुछ सामने आएगा....सब उनके लोग ही सामने ला रहे हैं... मगर राहुल गांधी के ज़बान फिसलने पर जो मंत्रियों की फौज, संबित पात्रा, सुधांशु त्रिवेदी, रविशंकर प्रसाद जैसे लोग सामने आकर लानत मलानत करते थे वह सुब्रमण्यम स्वामी और मधु किश्वर के आरोपों पर चुप्पी साधे हुए हैं, यहां तक कि सुब्रमण्यम स्वामी अभी तक भारतीय जनता पार्टी में बने हुए हैं। एक यति नरसिंहानंद है , जो सुब्रमण्यम स्वामी और मधु किश्वर कह रहे हैं वह दो साल पहले कह चुका है कि भाजपा में महिलाएं..... और नरेंद्र मोदी पर गंदे तरीके से दिल्ली विधानसभा में आरोप लगाने वाले कपिल मिश्रा को यही पार्टी मंत्री बना देती है। खैर, बिना तथ्य और सबूत के आरोप वैसे ही हैं जैसे भाजपा के नेता नेहरू गांधी परिवार पर लगाया करते थे.... बिना तथ्य के ही भाजपा की महिला सांसदों और एक महिला केंद्रीय मंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया गया...जो बिल्कुल उचित नहीं है। मगर वही चरित्र, वही तरीक़ा वही भाषा , वही आरोप जो इस कुनबे का चरित्र है... निशिकांत दुबे वाला , अनुराग ठाकुर वाला , संबित पात्रा वाला , सुधांशु त्रिवेदी वाला... सुब्रमण्यम स्वामी वाला.. जो बिना तथ्य और सबूत के गांधी - नेहरू परिवार के लिए ग़लत है तो बिना तथ्य और सबूत के नरेंद्र मोदी और तमाम भाजपा नेताओं पर भी ग़लत है। www.navjivanfoundation.org
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