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श्रीमन्नारायण स्वरूप विद्यमान गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती महाराज की जय हो विजय हो दारुण दुःख के अपनोदन में समर्थ उपनिषदर्थ दारु और रुद्र का अर्थ एक ही है। www.navjivanfoundation.org
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